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आठ महीने की गर्भवती, फिर भी निशाना नहीं चूका — मेघना सज्जनार की कहानी

August 17, 2026 · Rohit kumar

 

Air rifle shooting sport


आठ महीने की गर्भवती, फिर भी निशाना नहीं चूका — मेघना सज्जनार की कहानी जो दिल जीत ले गई

खेल की दुनिया में कई बार ऐसे पल आते हैं जो सिर्फ मेडल की चमक तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इंसानी हौसले की एक मिसाल बन जाते हैं। ऐसी ही एक कहानी सामने आई भारतीय शूटर मेघना सज्जनार की, जिन्होंने आठ महीने की गर्भवती होते हुए भी शूटिंग रेंज पर उतरकर मेडल जीत लिया — और पूरे देश को हैरान कर दिया।

कौन हैं मेघना सज्जनार

32 साल की मेघना सज्जनार कर्नाटक की रहने वाली एक अनुभवी निशानेबाज़ हैं, जो 2017 से भारत का प्रतिनिधित्व करती आ रही हैं। लंबे समय तक वो टीम में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच थोड़ी पीछे रह गई थीं, लेकिन बीते कुछ महीनों में उनका सफर बिल्कुल बदल गया। दरअसल अपनी प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में ही उन्होंने चीन के निंगबो में हुए वर्ल्ड कप में अपना पहला individual मेडल — एक ब्रॉन्ज़ — अपने नाम किया था। उस वक्त वो पांच महीने की गर्भवती थीं।

लेकिन असली चर्चा तब शुरू हुई जब नई दिल्ली के डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज में हुई Asian Rifle/Pistol Championship 2026 में मेघना ने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता — और उस वक्त वो आठ महीने की गर्भवती थीं।

शूटिंग रेंज पर दो दिलों के साथ खड़ी रहीं मेघना

10 मीटर एयर राइफल शूटिंग दुनिया के सबसे मुश्किल precision खेलों में गिना जाता है। इसमें निशानेबाज़ को महज़ आधा मिलीमीटर के निशाने पर गोली मारनी होती है, जिसके लिए शरीर का पूरी तरह स्थिर रहना, संतुलन बनाए रखना, और सांसों पर पूरा नियंत्रण ज़रूरी होता है। ज़रा सी भी शारीरिक हलचल पूरे नतीजे को बदल सकती है।

अब ज़रा सोचिए, इतने नाज़ुक खेल को कोई महिला अपनी प्रेगनेंसी के आखिरी महीनों में खेले, जहां शरीर का वज़न, पॉश्चर और संतुलन लगातार बदल रहा हो — यह किसी चुनौती से कम नहीं। मेघना ने खुद बताया कि जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ी, सांस लेना भी मुश्किल होता गया, लंबी सांस लेना या उसे रोक पाना पहले जैसा आसान नहीं रहा। बावजूद इसके, उन्होंने क्वालिफिकेशन राउंड में पांचवां स्थान हासिल किया और फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम कर लिया।

इतना ही नहीं, मिक्स्ड टीम इवेंट में उन्होंने रुद्रांक्ष पाटिल के साथ मिलकर क्वालिफिकेशन राउंड में तीसरा सबसे बेहतरीन स्कोर बनाया, और महिलाओं की टीम स्पर्धा में एलावेनिल वलारिवन और आर्या बोर्से के साथ मिलकर भारत को टीम गोल्ड मेडल भी दिलाया।

किस चीज़ ने दिया हौसला

मेघना ने अपने इस सफर के पीछे की प्रेरणा के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि दिग्गज टेनिस खिलाड़ी सेरेना विलियम्स की किताब और उनकी कहानी ने उन्हें बहुत प्रेरित किया। सेरेना ने भी अपने करियर में प्रेगनेंसी के दौरान खेल जारी रखने की मिसाल पेश की थी, और मेघना ने भी उसी हौसले को अपनाया।

उन्होंने यह भी बताया कि बेंगलुरु स्थित पादुकोण रैपिड स्पोर्ट्स सेंटर की सुविधाओं ने उनके लिए यह सफर आसान बनाया — वहां उन्हें कोई भारी सामान खुद उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी, बस जाकर ट्रेनिंग करनी होती थी और सामान वहीं छोड़कर वापस आ जाना होता था। दिल्ली में हुए इस टूर्नामेंट के दौरान भी उनके साथी निशानेबाज़ों ने उनका सामान उठाने में मदद की, जिससे उन्हें काफी मानसिक शांति मिली।

सोशल मीडिया पर उमड़ा सम्मान और तारीफ

जैसे ही मेघना की यह उपलब्धि सामने आई, सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ होने लगी। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने भी उन्हें बधाई देते हुए लिखा कि आठ महीने की गर्भवती होकर भी शूटिंग रेंज पर उतरना और मेडल जीतना उन्हें गहरा सम्मान और प्रशंसा से भर देता है। सिंधु ने यह भी कहा कि ताकत कई रूपों में आती है, और हौसला हमेशा अपना रास्ता खुद बना लेता है।

यह सिर्फ एक खिलाड़ी की तारीफ नहीं थी — यह उन तमाम महिलाओं के लिए एक संदेश जैसा भी था जो मातृत्व और करियर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं। मेघना की कहानी ने यह साबित कर दिया कि प्रेगनेंसी किसी महिला के जुनून या सपनों के आड़े नहीं आनी चाहिए, अगर सही सपोर्ट सिस्टम और हौसला साथ हो।

एक लंबे संघर्ष का नतीजा

मेघना का यह मेडल यूं ही नहीं आया। उनका करियर कई सालों की मेहनत और संघर्ष से भरा रहा है। 2018 के वर्ल्ड यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में उन्होंने इंडिविजुअल सिल्वर और टीम गोल्ड जीता था। इसके बाद 2022 और 2025 के काहिरा वर्ल्ड चैंपियनशिप में वो भारत की ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने वाली एयर राइफल टीम का हिस्सा रहीं। पिछले साल सितंबर में निंगबो वर्ल्ड कप में भी उन्होंने महिलाओं की एयर राइफल स्पर्धा में ब्रॉन्ज़ जीता था।

यानी यह कोई अचानक मिली सफलता नहीं थी, बल्कि सालों की निरंतरता और मेहनत का नतीजा था — जिसे उन्होंने अपनी ज़िंदगी के सबसे नाज़ुक दौर में भी जारी रखा।

क्यों खास है यह कहानी

मेघना सज्जनार की यह कहानी सिर्फ एक स्पोर्ट्स न्यूज़ नहीं है, यह हिम्मत और आत्मविश्वास की एक जीती-जागती मिसाल है। एक तरफ वो मां बनने की तैयारी कर रही थीं, दूसरी तरफ देश के लिए मेडल जीतने का सपना भी जिंदा रखे हुए थीं। यह दिखाता है कि इंसानी हौसला किसी भी हालात में रास्ता निकाल ही लेता है।

आने वाले समय में जब भी महिला खिलाड़ियों की हिम्मत और संघर्ष की बात होगी, मेघना सज्जनार का यह पल यकीनन याद किया जाएगा। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक मेडल नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।


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