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Rajasthan Farmer Buries ₹5 Lakh Cash in Field, Termites Destroy Money | राजस्थान के किसान ने खेत में गाड़े ₹5 लाख, दीमक ने कर दी मेहनत की कमाई बर्बाद

August 17, 2026 · Rohit kumar

 



खेत में गाड़े ₹5 लाख, एक साल बाद निकाला तो दीमक चट कर चुकी थी सारी मेहनत की कमाई

कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसा कुछ हो जाता है जिस पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। राजस्थान के बालोतरा जिले से एक ऐसी ही कहानी सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल छू लिया है और सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है। यह कहानी है एक किसान की मेहनत की कमाई की, जो सुरक्षित रखने की कोशिश में ही बर्बाद हो गई।

किसने क्या किया, ज़रा शुरुआत से समझिए

बालोतरा जिले के पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव में रहने वाले किसान मंगीलाल मेघवाल की यह कहानी है। करीब एक साल पहले मंगीलाल ने अपना एक प्लॉट बेचा था, जिसके बदले उन्हें लगभग 5 लाख रुपये मिले थे। उनका इरादा था कि इस पैसे से वो अपनी खेत की ज़मीन पर एक छोटा सा कमरा बनवाएंगे। लेकिन जैसा कि अक्सर गांवों में होता है, उन्हें डर सताने लगा कि इतनी बड़ी रकम घर में रखी तो कहीं चोरी न हो जाए, या घर के ही किसी सदस्य द्वारा खर्च न कर दी जाए।

इसी डर के चलते मंगीलाल ने एक अनोखा फैसला लिया। उन्होंने 500-500 रुपये के नोटों को एक पॉलिथीन की थैली में भरा, और रात के अंधेरे में चुपचाप अपने खेत में एक गड्ढा खोदकर उसे दबा दिया। घर में किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। उनका सोचना था कि यही सबसे सुरक्षित जगह है, आखिर खेत तो उन्हीं का है, वहां से कौन चुराएगा।

जब पैसे की ज़रूरत पड़ी, तब शुरू हुई असली मुसीबत

कुछ समय बाद जब मंगीलाल को उस पैसे की ज़रूरत पड़ी, तो एक नई समस्या खड़ी हो गई — उन्हें ठीक से याद ही नहीं आ रहा था कि उन्होंने वो थैली खेत में कहां दबाई थी। लगभग 10 बीघा के अपने पूरे खेत में उन्होंने कई दिनों तक ढूंढा, जगह-जगह खोदा, लेकिन पैसा नहीं मिला। आखिरकार थक-हारकर उन्होंने घर वालों को पूरी बात बताई। शुरुआत में परिवार को उनकी बात पर यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन बाद में सब मिलकर खेत में ढूंढने लगे। कई दिनों की मशक्कत के बावजूद पैसों का कोई सुराग नहीं मिला, और आखिरकार सबने उम्मीद छोड़ दी।

यह पैसा तब तक खेत की मिट्टी में दबा रहा, गुम सा हो चुका था, मानो कभी था ही नहीं।

बारिश ने खोला राज़, लेकिन खुशी की जगह मिला सदमा

कहानी में मोड़ तब आया जब हाल ही में हुई बारिश के बाद परिवार खेत में बुवाई की तैयारी कर रहा था। जुताई के दौरान ट्रैक्टर ने ज़मीन के अंदर दबी वो पॉलिथीन की थैली बाहर निकाल दी। अगले दिन मंगीलाल की पत्नी और बेटे की नज़र उस थैली पर पड़ी। सालों से गुम पैसा मिलने की खुशी में जब उन्होंने थैली खोली, तो जो देखा उसने पूरे परिवार को स्तब्ध कर दिया।

दीमक ने नोटों को बुरी तरह अपना निवाला बना लिया था। ज़मीन के अंदर करीब एक साल तक दबे रहने की वजह से ज़्यादातर 500 रुपये के नोट या तो पूरी तरह गल चुके थे, या फिर टुकड़ों में बदल चुके थे। जो पैसा किसी दिन एक पक्के कमरे का सपना पूरा करने वाला था, वो अब सिर्फ कागज़ के बेकार टुकड़ों का ढेर बनकर रह गया था।

बैंकों के चक्कर, फिर भी हाथ खाली

अपनी बर्बाद हो चुकी मेहनत की कमाई को बचाने की आखिरी उम्मीद में परिवार ने खराब नोटों को लेकर पचपदरा और बालोतरा की बैंक शाखाओं का रुख किया। लेकिन वहां से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। नोटों की हालत इतनी खराब थी कि स्थानीय बैंक शाखाओं ने उन्हें बदलने से मना कर दिया, और सलाह दी कि इसके लिए जयपुर स्थित बड़ी बैंक शाखा में संपर्क करें।

अब यहीं पर परिवार की असली मजबूरी सामने आती है। मंगीलाल का परिवार आर्थिक रूप से इतना सक्षम नहीं है कि आसानी से जयपुर जैसे बड़े शहर तक का सफर तय कर सके। सही जानकारी और संसाधनों की कमी के चलते अब तक वो जयपुर नहीं पहुंच पाए हैं। फिलहाल मंगीलाल बस इसी उम्मीद में हैं कि किसी तरह उनके खराब हो चुके नोट बदले जा सकें, और वर्षों की उनकी मेहनत की कमाई किसी तरह वापस मिल जाए।

यह कहानी वायरल क्यों हुई

सोशल मीडिया पर इस घटना का एक वीडियो तेज़ी से फैल रहा है, जिसमें दीमक से खराब हो चुके नोट एक टब में रखे दिखाई देते हैं, और मंगीलाल की परेशान शक्ल साफ बयां करती है कि उन पर क्या बीती होगी। लोगों ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं — कुछ लोग इसे किस्मत का क्रूर मज़ाक बता रहे हैं, तो कुछ इसे एक सीख की तरह देख रहे हैं कि बड़ी रकम को असुरक्षित तरीके से रखने की बजाय बैंकों या सुरक्षित माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहिए।

सच कहा जाए तो यह कहानी सिर्फ एक अजीबोगरीब घटना भर नहीं है। यह गांव-देहात की उस सच्चाई को भी उजागर करती है, जहां बैंकिंग सुविधाओं की कमी, जागरूकता की कमी, और पैसों को सुरक्षित रखने को लेकर पुराने तरीकों पर भरोसा आज भी लोगों को ऐसी मुश्किलों में डाल देता है। मंगीलाल का डर — कि पैसा चोरी हो सकता है या घरवाले खर्च कर सकते हैं — शायद कहीं न कहीं कई और लोगों के मन में भी होता होगा, लेकिन इतना बड़ा नुकसान शायद ही किसी ने सोचा होगा।

आगे क्या होगा?

फिलहाल मंगीलाल और उनका परिवार उम्मीद के सहारे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक की गाइडलाइंस के अनुसार, कुछ हद तक खराब हुए नोट भी बदले जा सकते हैं, बशर्ते नोट की पहचान संभव हो। अब देखना यह है कि क्या मंगीलाल का परिवार जयपुर तक पहुंचकर अपनी मेहनत की कमाई का कुछ हिस्सा वापस पा सकेगा, या यह कहानी सिर्फ एक कड़वी सीख बनकर रह जाएगी।

एक बात तो तय है — इस घटना ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि चाहे नीयत कितनी भी अच्छी क्यों न हो, पैसों को ज़मीन में गाड़ने से बेहतर है उन्हें बैंक जैसी सुरक्षित जगह पर रखना। शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सबक है।


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